परिणति पर्व उपधान 2025 के अंतर्गत मैत्री, प्रमोद, करुणा और माध्यस्थ—इन चार भावनाओं पर आधारित इस गहन प्रवचन के माध्यम से अपनी आध्यात्मिक साधना को और अधिक सुदृढ़ बनाएं। यह सत्र समझाता है कि कैसे ये चार भावनाएं हमारे आंतरिक परिणामों (विचारों) को बदल सकती हैं और हमारे व्यवहार को शुद्ध कर सकती हैं। जैन शासन द्वारा दर्शाए गए इन सद्गुणों को विकसित कर अपनी आत्मा की गहनता को स्पर्श करने का प्रयास करें।