इस व्याख्यान में धर्मद्रव्य के सही और उचित उपयोग पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि गुरु को अर्पित किया गया धन (गुरुद्रव्य) विशेष रूप से वैयावच्च — अर्थात साधु-साध्वियों की निःस्वार्थ सेवा — के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। यह वीडियो दर्शकों को जैन सिद्धांतों के अनुसार धार्मिक संसाधनों के प्रबंधन और समर्पण का मार्गदर्शन करता है।