विवरण
यह सत्र जैन परंपरा के विभिन्न गच्छ, गण, शाखा और कुल — जैसे निर्ग्रंथ, वनवासी, तपा और वड गच्छ — का संक्षिप्त परिचय देता है। इसमें स्वामी समन्तभद्र, आचार्य देवेंद्र सूरी और आचार्य धर्मघोष सूरी जैसे प्रभावशाली आचार्यों एवं ग्रंथों पर प्रकाश डाला गया है। अंत में जिनशासन में विविधता के भीतर एकता के प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं।