विवरण
यह व्याख्यान जैन इतिहास के अध्ययन के महत्व और उससे जुड़ी ऐतिहासिक उपेक्षा पर प्रकाश डालता है। इसमें जैन धर्म के भौगोलिक विस्तार, सम्राट सम्प्रति के योगदान, तथा भाषा, साहित्य और मुनियों की भूमिका पर चर्चा की गई है। अंत में जैन ग्रंथों की संरचना और इस अमूल्य ज्ञान के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया गया है।