योगदृष्टिसमुच्चय वाचना

योगदृष्टिसमुच्चय वाचना | भाग 7

विवरण

योगदृष्टिसमुच्चय आचार्य हरिभद्रसूरि द्वारा रचित जैन दर्शन का महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें आत्मविकास की आठ योगदृष्टियों का वर्णन है, जो अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाती हैं। यह ग्रंथ संयम, विवेक और आत्मअनुशासन सिखाता है। युवाओं के लिए यह जीवन में संतुलन, धैर्य और आंतरिक शक्ति का मार्ग दिखाता है।

All Videos