
VJAP_13 जैन साहित्य और समाज
सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक विकास पर जैन साहित्य के गहरे प्रभाव का विश्लेषण करना, और यह रेखांकित करना कि कैसे पवित्र ग्रंथ और समकालीन लेखन आधुनिक सामुदायिक जीवन को मार्गदर्शित और समृद्ध करते हैं।
पंचसूत्र: श्री हरिभद्रसूरिजी महाराज द्वारा रचित आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करने वाले पांच सूत्रों का समूह। इसमें निम्नलिखित विषयों पर क्रमवार विचार किया गया है: पापवृत्ति का निवारण: जीवन में पाप की प्रवृत्तियों का नाश कैसे किया जाए और गुणों को आत्मसात करने की पात्रता कैसे विकसित की जाए। श्रावक का जीवन: एक श्रावक (धर्मपरायण गृहस्थ) अपना जीवन किन सद्भावनाओं और प्रतिज्ञाओं के साथ व्यतीत करे। संयम की तैयारी: संयमपूर्ण जीवन (दीक्षा) ग्रहण करने की इच्छा रखने वाला श्रावक उसकी पूर्व-तैयारी कैसे करे। मुनि जीवन: एक मुनि की दिनचर्या (चर्या), उनकी भावनाएं और उनके जीवन जीने की शैली कैसी होनी चाहिए। मोक्ष का सुख: मोक्ष प्राप्ति के पश्चात के आनंद और सुख का स्वरूप कैसा होता है। इन पांचों सूत्रों के अध्ययन से जीवन में सहज रूप से आध्यात्मिकता विकसित होती जाती है। यहाँ इन पांचों सूत्रों के रहस्य को समझाने वाले प्रवचन प्रस्तुत किए गए हैं।