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अनेकांत के प्रस्थापक प्रभु वीर और अनेकांत के समर्थक आचार्यों के सहारे की गई यात्रा के दौरान दिए गए तथा अत्यंत प्रशंसित पाँच प्रवचनों का यह संकलन है। अहिंसा और अनेकांत को परस्पर पिरोने का एक सार्थक प्रयास।