शासननी रक्षा छे प्यारी | भाविक शाह

विवरण

यह गीत शासन के प्रति गहन भक्ति को व्यक्त करता है — शासन अर्थात तीर्थंकरों द्वारा दिए गए उपदेश, नैतिक सिद्धांत और आध्यात्मिक मार्गदर्शन, जो भक्त को सांसारिक मोह, अज्ञान और दुःख से सुरक्षित रखते हैं। यह दर्शाता है कि शासन का पालन करने से आंतरिक शांति, आध्यात्मिक शक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

शासननी रक्षा छे प्यारी

शासननी शोभा न्यारी

शासननी आणा धारी

शासननी जउं बलिहारी

शासननी रक्षा छे प्यारी

शासननी शोभा न्यारी

शासननी आणा धारी

शासननी जउं बलिहारी

देवगुरुना... शरणे जईने रहेवुं

केवलीना... कह्या, बस धर्मप्रवाहे वहेवुं

देवगुरुना... शरणे जईने रहेवुं

केवलीना... कह्या, बस धर्मप्रवाहे वहेवुं

मंडन हो... वज्जर थईने, आपत्तिने चुरवानी

मंडन हो... नीडर थईने, ज्योतिने पुरवानी

शासननी रक्षा छे प्यारी

शासननी शोभा न्यारी

शासननी आणा धारी

शासननी जउं बलिहारी

शासननी रक्षा छे प्यारी

शासननी शोभा न्यारी

शासननी आणा धारी

शासननी जउं बलिहारी

तीर्थोनी... रक्षानी... लडाई अमने फावी छे

चाणक्य... नीतिनी... चर्चा तो अमने भावी छे

जोखमनी सामे झूझवुं

एवी तो शासनभक्ति छे

न झूकवुं, न मूकवुं

शासनने सोंपी शक्ति छे

पणया वीरा महावीहिं

ए तो अमारो मंत्र छे

शिवमस्तु सर्व सृष्टिनुं

सूत्रे अमारुं तंत्र छे

मंडन हो... वज्जर थईने, आपत्तिने चुरवानी

मंडन हो... नीडर थईने, ज्योतिने पुरवानी

शासननी रक्षा छे प्यारी

शासननी शोभा न्यारी

शासननी आणा धारी

शासननी जउं बलिहारी

झंझावातो प्रचंड आवी पडे

ज्ञाननो दीवो झगमगातो रहे

घनघोर घटा हो के आंधी ऊठे

ज्ञाननो सूर्य चमचमातो रहे

मंडन हो... वज्जर थईने, आपत्तिने चुरवानी

मंडन हो... नीडर थईने, ज्योतिने पुरवानी

शासननी रक्षा छे प्यारी

शासननी शोभा न्यारी

शासननी आणा धारी

शासननी जउं बलिहारी

श्रमणोनी सेवानी लगनी हैये लागी

श्रमणीनी रक्षानी बुद्धि हवे जागी

महावीरना शासननी मोंघी मूडी

भावना ए हैये ऊंडी-ऊंडी रूडी

हो, जैनोना उत्कर्षे सर्वस्व स्वाहा करवुं छे

आतमना ओवारे सौ साथ-साथ तरवुं छे

कोई स्वप्न ना तूटे, कोई आशा ना छूटे...

अमे चाहीए जेने दिलथी, एनी हाम ना खूटे...

मंडन हो... वज्जर थईने, आपत्तिने चुरवानी

मंडन हो... नीडर थईने, ज्योतिने पुरवानी

शासननी रक्षा छे प्यारी

शासननी शोभा न्यारी

शासननी आणा धारी

शासननी जउं बलिहारी

चाले छे जे सतनी लडाई

दुनिया मारी एमां पडघाई

जो आ जमीन (शासन-शासन)

जो आ आकाश (शासन-शासन)

जो आ हवा (शासन-शासन)

जो आ प्रकाश (शासन-शासन)

दर दिवसे ने दर राते ने

दर क्षणमां गूंज गाजी

अमे जीतीशुं अमे जीतीशुं

अमे जीतीशुं दर बाजी

शासननी रक्षा छे प्यारी

शासननी शोभा न्यारी

शासननी आणा धारी

शासननी जउं बलिहारी

शासननी रक्षा छे प्यारी

शासननी शोभा न्यारी

शासननी आणा धारी

शासननी जउं बलिहारी