विवरण
यह गीत प्रतीकात्मक नहीं है — यह जैन ग्रंथों में वर्णित वास्तविक अप्सराओं के बारे में सीधे तौर पर है, जो एक दिव्य अवसर का उत्सव मनाने के लिए मंदिर आती हैं। यह आनंद, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह को व्यक्त करता है और स्वर्गीय सत्ताओं की उपस्थिति से मंदिर के भर जाने का सजीव चित्र प्रस्तुत करता है।
बोल
अंबर-तलनी कलहंसिनी
पूनम-चांदनी न्हाई
सोने सजेली रूपे खचेली
रत्नप्रभा तनु छाई...
ही... रमणी कमनी वासु-दमनी
वेणी शिखा लहराई...
ही... यौवन-वीजळी गगन प्रजळी
सृष्टि निखिल चमकाई...
अप्सरा आई, प्रभुपूजा मन भाई
अंगी रचाई, अजब धून मचाई
गीति गाई, नूतन नाच नचाई
अप्सरा आई, प्रभुपूजा मन भाई
अभिराम सूरत सोहनी, मदन-मोहनी, कुसुम शणगार
गजराज अलस-गामिनी, तेज दामिनी, अधिक रूपभार
मदमत्त झलक आरुणी, छलक वारुणी, नयन तलवार
भक्तिरसनी ऊमटी लाली, शोभा कांई निराली
जाणे मरीचि मुक्तामाली, पूजनार्थं चाली
ही... रमणी कमनी वासुदमनी
वेणी शिखा लहराई...
ही... यौवन-वीजळी गगन प्रजळी
सृष्टि निखिल चमकाई...
अप्सरा आई, प्रभुपूजा मन भाई
अंगी रचाई, अजब धून मचाई
गीति गाई, नूतन नाच नचाई
अप्सरा आई, प्रभुपूजा मन भाई