विवरण
गीत के बोल समर्पण और आध्यात्मिक प्रेम को व्यक्त करते हैं, जो ईश्वर के और निकट होने की चाह रखने वाले व्यक्ति की अंतरात्मा की भावनाओं को दर्शाते हैं, और यह स्वीकार करते हैं कि दिव्य प्रेम साधारण शब्दों से कहीं परे है।
बोल
हुं तने समजावुं शुं?
न तुज विना ठरतो हुं...
तुं शुं जाणे प्रीत मारी?
जोउं हुं राह तारी
तुं नाथ ने साथ मारो
हुं तने समजावुं शुं?
न तुज विना ठरतो हुं...
मारा हैये शोधी लीधी छे
तुज होवानी सुवास...
तुं जो मारी साथे रहे तो
ए मारो अभिलाष...
जीवन मारुं होये... सघळुं तारुं
हुं शुं करुं बीजुं?
साची प्रतीत मारी
जोउं हुं राह तारी
तुं नाथ ने साथ मारो
हुं तने समजावुं शुं?
न तुज विना ठरतो हुं...
आ नथी थतुं सारुं हवे...
आ नथी थतुं सारुं हवे
तुं माराथी दूर रहे
निशदिन दर्शन विना...
निशदिन दर्शन विना
मारी आंखोथी आंसु वहे
तारा विना क्यां हुं जाउं?
मारा हैयाना श्वास!
तारा चरणे शरणुं मारुं
ए मारो विश्वास
तारी कृपा होये... मंडन मारुं
करती रहे
खूटे न हाम मारी
जोउं हुं राह तारी
तुं नाथ ने साथ मारो
हुं तने समजावुं शुं?
न तुज विना ठरतो हुं...