विवरण
जैन आरती तीर्थंकरों की स्तुति में गाया जाने वाला भक्ति गीत है। यह श्रद्धा, कृतज्ञता और आध्यात्मिक भावना को प्रकट करती है तथा मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों में गाई जाती है।
बोल
जय जय आरती आदि जिणंदा
नाभि राया मरुदेवी को नंदा।
पहेली आरती पूजा कीजे
नरभव पामीने लहावो लीजे।
दूसरी आरती दीनदयाला
धूळेवा मंडपमां जग अजवाला।
तीसरी आरती त्रिभुवन देवा
सुर नर इंद्र करे तोरी सेवा।
चोथी आरती चउ गति चूरे
मनवांछित फल शिवसुख पूरे।
पंचमी आरती पुण्य उपाया
मूळचंदे ऋषभ गुण गाया।