तारो साथ नेमिनाथ | कुशल जैन (शेठ)

विवरण

हृदयस्पर्शी जैन भक्ति गीत “तारो साथ नेमिनाथ” प्रस्तुत है, जो 22वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान को समर्पित है। यह गीत निरंतर सान्निध्य और मार्गदर्शन की प्रार्थना है, जो गहन भक्ति और अटल श्रद्धा से अनुप्राणित है।

श्वासे श्वासे नाम जपवुं माहरे तारुं

रोमे रोमे नाम रटवुं माहरे तारुं

मारा हृदये.. मारा रगेरगमां

नेमी बस एक तुं

हर क्षणे ने हरपळे नेमी

तुं ज तुं बस तुं


भवोभव मळतो रहे

तारो साथ नेमीनाथ

भवोभव मळतो रहे

तारो हाथ नेमीनाथ (२)


नेमि निरंजन.. तारूं स्मित चाहुं

नेमि निरंजन.. तारी प्रीत चाहुं

नेमि निरंजन.. तारूं गीत गाउं

नेमि निरंजन.. तारी रीत ध्याउं

नाथ तारी पास आवुं

भेटवा ज्यारे

तुजने बस तुजने ज हुं

निरखी रहुं त्यारे

आंखेथी अश्रुनी धारा वहेती रहे

ते क्षणे

तने छोडीने ना जाउं एवुं

लागे हरपळे

रहेवुं छे तुज संगाथ

आपो साथ मारा नाथ

छे स्वीकार हर एक वात

मारा नाथ नेमिनाथ


भवोभव मळतो रहे

तारो साथ नेमीनाथ,

भवोभव मळतो रहे

तारो हाथ नेमीनाथ (२)



मारा श्यामळा, तारणहारा

मारा नेमिनाथ

सुणजोने वात, करजो मिलाप

मारा नेमिनाथ (२)


हे सत्वशाळी, ब्रम्हचारी

नेमि गिरनारी

वैराग्यरस वहेलो हुं पामुं

विनती ए मारी

हृदियामां नेमि नेमिनी

सरगम छे लहेराई

तारा नामनी, तारा प्रेमनी

मनमां छे धून छाई


भवोभव मळतो रहे

तारो साथ नेमीनाथ,

भवोभव मळतो रहे

तारो हाथ नेमीनाथ (२)