यह ध्यान श्मशान भूमि के चिंतन के माध्यम से वैराग्य (अनासक्ति) के संवर्धन पर केंद्रित है, जो मृत्यु, अनित्यता तथा आत्मा की पारलौकिकता के प्रति गहन बोध को विकसित करता है।