१८ पापस्थानक आलोचना ध्यान

विवरण

१८ पापस्थानक आलोचना ध्यान अठारह पापों पर आत्मचिंतन की जैन ध्यान साधना है। यह आत्मनिरीक्षण, पश्चाताप और नैतिक शुद्धि को बढ़ावा देता है, जिससे सही आचरण और आध्यात्मिक उन्नति होती है।