चंदनबाला जैन मंदिर के विषय में मार्गदर्शन
बॉम्बे हाई कोर्ट ने १६ अप्रैल २०२६ को वालकेश्वर के चंदनबाला जैन मंदिर के मामले में एक आदेश पारित किया है, जिसके तहत अनधिकृत रसोई, विभाजन की दीवारों और स्टील गेट जैसे निर्माणों को अस्थायी (Interim) संरक्षण प्रदान किया गया है । हालांकि समाज में इसे "विजय" के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह केवल आगे की सुनवाई तक का अवसर है और यदि ये निर्माण अवैध पाए गए, तो महानगरपालिका को कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है । महाराष्ट्र रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एक्ट, १९६૬ की धाराओं के तहत प्रशासन को किसी भी अवैध ढांचे को हटाने का अधिकार प्राप्त है, इसलिए सजग रहते हुए नियमितीकरण (Regularization) का मार्ग अपनाना ही विवेकपूर्ण है । यह प्रकरण हमें याद दिलाता है कि ट्रस्टी केवल संपत्ति के संरक्षक होते हैं और कोई भी निर्माण सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना नहीं होना चाहिए । अंततः, धर्म की सेवा वही है जो सत्य और विधि-सम्मत मार्ग पर चले, क्योंकि कानून की अनदेखी कर किया गया कोई भी कार्य जिनशासन की उज्ज्वल छवि को प्रभावित कर सकता है ।