जानने की इच्छा और सत्य को पाने की लालसा प्रभु का वरदान है

सत्य को जानने और उसे आत्मसात करने की जिज्ञासा का हृदय में जागृत होना ईश्वर की महती कृपा और एक दुर्लभ वरदान का संकेत है। संसार की नश्वर वस्तुओं के बीच रहते हुए भी शाश्वत सत्य की खोज करने की प्रेरणा केवल वही आत्मा पाती है जिस पर परमात्मा का अनुग्रह होता है। यह पवित्र जिज्ञासा मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से बाहर निकालती है और आध्यात्मिक प्रगति के मार्ग पर अग्रसर कर आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाती है।